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वो बचपन

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वो भी क्या दिन थे ऐ यारों, ना चिंता-बोझ सताती थी। दोस्तों के संग बस मस्ती में, स्कूल लंच संग भाती थी।। वो होमवर्क ना करने पर, टीचर की डांट बहुत खाना। स्कूल खत्म हो जाने पर, बस घर पर जल्द पहुंच जाना।। गर्मी की छुट्टी मिलते ही, यात्रा पर शीघ्र निकल जाना। वापस आकर खट्टे-मीठे, दोस्तों को हाल सुना जाना।। वो अंतिम दिन था फेयरवेल का शांत और मायूस थे हम। चेहरे पर थी मुस्कान मगर, अन्तर में था बिछुड़न का गम।। समय का पहिया तीव्र गति से, घूमा और वक्त बदलता गया। सफल होने की चाहत में, बस सबकुछ पीछे छूट गया।। मंजिल पहुंच कर देखा तो, खुद को पाया केवल तन्हा। बस यादें शेष थीं दोस्तों की, जो साथ गुजारे थे लम्हा।।

आदिशक्ति नवदुर्गा मां

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जगत जननि हे मां अम्बे, तुम हो  जग की आदिशक्ति। प्रारंभ हुआ है पर्व आज, है चैत्र शुक्ल नवरात्रि।। हे शिव अर्धांगिनी, शैलसुता, है प्रथम दिवस का रूप आपका। सिंह सवार सुशोभित मां तुम, अनुपम दिव्य स्वरूप आपका।। एक हाथ में है त्रिशूल और दूजे में है पुष्प कमल। हे श्वेतवस्त्रधारिणी माता, तुम्हारी कृपा से जीव सफल।। हे शांति रूप गिरिजा माता, अब दया करें यह करूं याचना। हाथ जोड़ हम विनती करते, शरणागत हो करूं प्रार्थना।। तपधारिणी मां ब्रह्मचारिणी द्वितीय दिवस है आपका। ज्ञानरूपधारिणी माता अज्ञान हरो हम सबका।। एक हाथ में लिए कमंडल और दूजे में माला। ममतामयी हो दिव्य रूप है, अद्भुत तेज निराला।। हे श्वेतवस्त्रधारिणी माता, हे जगजननी करुणा कर दो। तपबल संयम सदाचार और सतपथ ही जीवनपथ हो।। घंटाकार है अर्धचन्द्र, शोभित माथे पर आपके। तृतीय दिवस पर नवरात्रि में पूजन होता आपके।। हे दस भुजा धारिणी माता, सौम्या शांति स्वरूपा। सिंह सवारी, दुग्ध पुष्प फल भोग ही अर्पित होता।। दुष्ट विनाशिनि, भक्ततारिणी माता तेरी जय होवे। हाथ जोड़ हम विनती करते क्षमा दया हम पर होवे।। ब्रह्माण्डजननि मां कुष्मांडा चौथे दिन पूजन होता। ...

महाशिवरात्रि -2026

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हे विश्वनाथ, देवाधिदेव हे त्रिदेव रूप, हे महादेव त्रिनेत्रधारी कैलाशपति हे आशुतोष गिरिजापति पावन पर्व यह महाशिवरात्रि फाल्गुन मास कृष्णपक्ष चतुर्दशी देवाधिदेव बने आज पार्वतीपति मंगल परिणय बेला की यह पावन तिथि हे नीलकंठ हे गंगाधर पशुपतीनाथ हे शिवशंकर हे महाकाल हे भूतनाथ हे रुद्रदेव हे भोलेनाथ छाया है हर्षोल्लास, देख तीनों लोकों में आज शिव बारात लिए हैं आए, पर्वतराज के घर आज हे महेश्वर, त्रिपुरारी हे नटराज, जटाधारी  हे शशिधर, हे सर्वेश्वर हे मृत्युंजय, हे नंदीश्वर देवी-देवता सब साक्षी, बरसाते नभ से हर पल पुष्प पावन पर्व महाशिवरात्रि, शिव-गौरी परिणय अभिरूप हे अर्धनारीश्वर, भालचंद्र हे अमृतेश्वर, हे योगेश्वर हे त्रयंबक, वैद्यनाथ हे कालभैरव, सिद्धनाथ कार्तिकेय और श्रीगणेश हैं, पुत्र शिवपार्वती के यदि सच्चे मन से हो पूजा,तो करते हैं दुख दूर सभी के हे सोमनाथ, हे धुश्मेश्वर केदारेश्वर शैलश्रृंगेश्वर हे रामनाथ हे अमलेश्वर हे नागेश्वर हे भीमेश्वर चार प्रहर करते हैं आज हम, प्रभु शिव की आराधना व्रत रखकर हम आज हैं करते, प्रभु शिव की उपासना हे अघोरेश्वर, हे तारकेश्वर हे योगेश्वर, हे विश्वेश्वर ह...

नारी शक्ति(महिला दिवस )

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नारी तुम इक शक्ति हो और जीवन की अभिव्यक्ति हो। तुम बहन हो, मां हो, बेटी हो और जीवनसंगिनि पत्नी हो।। हर रूप में ढल जाती हो तुम और ममता का प्रतिरूप हो तुम। परिवार-देश की धुरी हो तुम और सब संभव कर जाती तुम।। कितनी भी हो कठिन परिस्थिति, क्षण भर में सुलझाती तुम। साहस, करुणा, प्रेम हृदय में, भरकर जीत दिलाती तुम।। ईश्वर ने जग में रूप लिया, मां का स्वरूप बस तुम्हें दिया। संतति को बढ़ते रहने का, इक जिम्मेदारी तुम्हें दिया।। नारी जग का अभिमान हो तुम, हर पुरुष की अद्भुत शान हो तुम देवी हो, शक्ति-पूजित हो, ईश्वर की भी तो जननी तुम।। कोटि नमन नारी शक्ति को, यशोगान संसार करे। युगों -युगों तक शान तुम्हारी, इस धरती पर बनी रहे।।

महापर्व है महाव्रत का

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छठ व्रत का महापर्व छठ व्रत का यह महापर्व और सूर्यदेव का पूजन पर्व। सूर्यदेव की स्वसा आप हो,  ब्रह्मा की मानसपुत्री हो।। कठिन महाव्रत छठ मैया का, कार्तिक षष्ठी शुरू पर्व का। अद्भुत व्रत है तीन दिवस का, पूजा संध्या काल उषा का।। अर्घ्य दिया जाता छठ व्रत में, डूबते और उगते सूरज को। मंत्र न कोई पंडित रहता, नमन हृदय की उस श्रद्धा को।। प्रथम दिवस है न्हाय खाय का, द्वितीय दिवस है खरना का। तृतीय दिवस है निर्जल व्रत का, अर्घ्य डूबते सूरज का।। चतुर्थ दिवस को उषाकाल में, उगते सूर्य को देते अर्घ्य। फल प्रसाद का पारण करके, व्रत को पूरण करते सब ।। नदी किनारे घाट स्वच्छ कर, धूप दीप से डाल सजाकर। ठेकुआ, लड्डू, फल अर्पण कर, हाथ जोड़कर शीश नवाकर।। छठ मैया और सूर्यदेव को, बारम्बार प्रणाम करें। सदा सुहागिन हमको रखना, कुल-कुटुम्ब सानन्द रहें।। संतानो की रक्षा और स्वास्थ्य का आशीष  देकर, बना रहे आपका आशीर्वाद हम सब पर ।।

दीपावली - प्रकाश पर्व

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आओ चलो एक दीप जलाए  जग से अंधकार को मिटाए     सारे जहां में रोशनी फैलाए  मन से अज्ञान को हटाए  मीठे मीठे पकवान खाए ढेर सारे आतिशबाजी बजाए  गिले शिकवे भूल सबको गले लगाए  सबके जीवन में खुशियां आए  रोशनी का यह अद्भुत पर्व मनाए  मां लक्ष्मी हम सब पर आशीर्वाद बरसाए  जोश और उत्साह से दिवाली मनाए सबको है दिवाली की हार्दिक शुभकामनाएं।

दीपावली - प्रकाश पर्व

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आओ चलो एक दीप जलाए  जग से अंधकार को मिटाए     सारे जहां में रोशनी फैलाए  मन से अज्ञान को हटाए  मीठे मीठे पकवान खाए ढेर सारे आतिशबाजी बजाए  गिले शिकवे भूल सबको गले लगाए  सबके जीवन में खुशियां आए  रोशनी का यह अद्भुत पर्व मनाए  मां लक्ष्मी हम सब पर आशीर्वाद बरसाए  जोश और उत्साह से दिवाली मनाए सबको है दिवाली की हार्दिक शुभकामनाएं।

जूनून ए सफर

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कभी लगता है कितनी आसान है रास्ते मंजिल के  पहुंच जाएंगे यूंही कुछ कदम चलकर  मंजिल पे  मंजिल पे पहुंच कर हुआ दूरी का अहसास हमको  तय करना है अभी कांटों भरा मुश्किल सफर हमको हराना जीतना तो अपने मुकद्दर की बात है क्या खोया क्या पाया ये तो तकदीर की सौगात है करना है अपना प्रयास हमको अपना शत प्रतिशत जीना अपने सपनों के साथ हमको तभी बदलेगी किस्मत  मंजिल पे पहुंचने का जूनून ही पहुंचाएगा शिखर पर एक नया अध्याय लिख जायेंगे हम अथक निरन्तर साधना कर।

कल्पना एक नए जहां की

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आओ चलो एक नई दुनिया बसाए  प्यार के इंद्रधनुषी रंगों से उसको सजाए  न हो वहां कोई मजहब की ऊंची दीवारें  न हो वहां कोई नफरत की ऊंची मीनारें  चारों ओर हो फैला इंसानियत का रंग सब मिलजुल कर रहे वहां इक संग ।

" एक पेड़ मां के नाम"

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आओ मिलकर पेड़ लगाएं, धरती मां को स्वर्ग बनाएं। पेड़ हमारी मां के जैसा,  छाया अरु फल जिससे मिलता।। आए आंधी या तूफान , करता रक्षा बन चट्टान। इत मां दु:ख सहकर मुस्काती, उत मलिन वायु को शुद्ध बनाती। यही वजह वर्षा होने का, यही वजह उपजे अन्नों का, यही वजह है फैले वन का, यही वजह है पर्यावरण बचाने का।। यही वजह भू-संरक्षण का, यही वजह जल-संरक्षण का। यही वजह है हरियाली का, यही वजह है खुशहाली का।। पेड़ बिना जीवन नहिं संभव, यह जीवनदायिनी मां धरती पर। करुणा, म मता, त्याग का संगम, जीवन का पाठ पढ़ाता हरदम।। मां के नाम एक पेड़ लगाएं, भूस्वच्छ प्रदूषणरहित बनाएं। लेकर हाथों में हाथ सभी का, करें सुरक्षा जल-थल-नभ का।                   

दशहरा - पर्व है बुराई पर अच्छाई की जीत

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आज दिन है दशहरा के पावन पर्व का  आज है दिन बुराई पर जीत का आज है दिन अंधकार पर जीत का आज है दिन अहंकार पर जीत का आज है दिन अधर्म पर जीत का  आज है दिन असत्य पर जीत का आज है दिन अज्ञान पर जीत का आज है दिन अत्याचार पर जीत का आज है दिन अन्याय पर जीत का आज है दिन पाप पर जीत का आज है दिन क्रोध पर जीत का आज है दिन नकारात्मक पर जीत का आज है दिन अपने भीतर के रावण पर जीत का  आज है दिन एक दृढ़ संकल्प का आज है दिन अद्भुत प्रकाश पर्व का आओ करके प्रभु श्री राम का ध्यान मैं को त्याग कर करे प्रभु राम को प्रणाम  आओ चलो चले मानव जीवन के कठिन डगर पर आज दिन दशहरा का आया है एक नया अध्याय लेकर।

नवरात्रि - मां आदिशक्ति के नवरुपों की अनुभूति यात्रा

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हे माता वृषारूढ़ा हे माता शैलपुत्री हे श्वेत रूप धारिणी हे दिव्य रूप धारिणी हे योग रूप धारिणी हे चन्द्ररूप शीतल शान्ति प्रदायिनी श्वेत वृषभ है सवारी आप का                                    हैं स्वरूप आध्यात्मिक और प्रेरणादायी आप का है स्वरुप ज्ञानमयी और शक्तिदायी आप का  शोभित है त्रिशूल दाएँ हाथ में और बाएं में कमल का फूल खीर , दीपक घी का और अर्पित करते हैं चरणों में गुड़हल के फूल  यूही बनाए रखना कृपा हम पर  हे जग जननी बनाए रखना आशीर्वाद संपूर्ण विश्व पर । हे मां ब्रह्मचारिणी हे मां ज्योतिर्मयी हे ज्ञान ,शक्ति, विवेक ,धैर्य, तप प्रदायिनी हे मां तपश्चारिणी हे मां अर्पणा  हे मां योगिनी हे मां उमा  हे श्वेत वस्त्र धारणी  हे नकारात्मक शक्ति नाशिनी  हाथों में है जप की माला और कमंडल  फूल है आपको प्रिय गुड़हल  सदा रहे यूंही आशीर्वाद आपका यही करबद्ध है हमारी प्रार्थना। हे मां चंद्राघंटा हे मां महिषासुरमर्दनी हे मां सिंहारूढ़ा हे मां कल्यारिणी  हे दस ...

ब्रह्माकुमारी- एक यात्रा अनंत की

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दुनिया को राजयोग का पाठ सिखाने आत्मा से परमात्मा का साक्षात्कार कराने  स्वयं को  स्वयं के सत्य स्वरूप से मिलवाने  हम सबको शांति और पवित्रता का मार्ग दिखाने  कर्मों का हम सब को महत्व समझाने स्वयातमा को आलौकिक दुनिया की यात्रा करवाने  हम सब को जीवन का सत्य सार बताने  दुनिया को स्व परिवर्तन से विश्व परिवर्तन की राह दिखाने  विश्व को सर्वप्रथम मातृशक्ति की अद्भुत शक्ति दिखाने  सम्पूर्ण जगत को जीवन जीने का शांति मार्ग दिखाने  विश्व रहेगा कृतज्ञ  हमेशा ईश्वरीय ब्रह्मा बाबा आपका  सादर नमन है आपके चरणों में हम सबका

हे गजानन

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हे विघ्नहर्ता, शिव पार्वती नंदन श्री गणेश  हे दुःखहर्ता,देवों में प्रथम पूज्य हे श्री गणेश आगमन होता है आपका भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी के दिन  चहुंओर छाया रहता है हर्षोल्लास और उत्सव नव दिन सजते है पंडाल और घर फूलों, दीपक ,रंगोली से  करते हैं अर्पण पकवान और मोदक जो प्रिय है आपको सबसे हे भाग्य विधाता ,हे रिद्धि-सिद्धि  दाता  हे सिद्धि विनायक, हे सर्व सुखदाता यूही बनाए रखना सदा कृपा अपना हम पर  चलना है हमको सच्चाई और आदर्श के मार्ग पर  हे गणपति बप्पा मेरे,हे प्रभु गणेश मेरे  तेरे चरणो में नमन है, हे गणनायक मेरे!

अध्यात्म की यात्रा

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निकले हैं हम आध्यात्म की यात्रा पर आज  खोजने है अपने आप को हम आज  कुछ सवालों का जवाब जानने को है मन उत्सुक  क्या है इस जीवन का है उद्देश्य मन  जानने को इच्छुक  भागते रहते सपनों की मृगमरीचिका के पीछे हम  सब कुछ पाने की चाहत में भूल जाते हैं अपने आप को हम  छूट जाता सब कुछ इस अंतहीन इच्छाओं की अभिलाषा में  रह जाता है खालीपन मंजिल पर पहुंच कर जीवन में   चले हैं आज जीवन यात्रा पर खोजने हम अपने आप को  चले है आज जीवन यात्रा पर खोजने हम अपने आप को 

कान्हा

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मेरे कृष्णा, मेरे गोपाला,मेरे कान्हा  लेकर विष्णु अवतार पृथ्वी पर जन्मा, करने कल्याण सृष्टि का  देने जग को ज्ञान गीता का , मां देवकी का दुलारा मां यशोदा की आंखों का तारा, गोकुल की अद्भुत बाल लीला  माटी खा ब्रह्मांड दिखाया,मेरे गोपाला, मेरे माखनचोर, मेरे गिरधारी  मेरे नंदलाला ,मेरे मोर मुकुटधारी,   कलिया को नाथा,गोवर्धन पर्वत को कनिष्ठा पे उठाया कंस के अत्याचारों से जग को मुक्ति दिलाया , मुरली की मधुर धुन से जग हुआ मोहित  गोपियां के संग रास लीला ने किया सम्मोहित  राधा कृष्ण प्रेम की अद्भुत पराकाष्ठा  आध्यात्मिक प्रेम की अमर गाथा, विश्व को भक्ति,ज्ञान और कर्म योग का मार्ग दिखाकर  गीता का अद्भुत ज्ञान बताकर  धर्म पथ पर चलना सिखलाकर सबको सत्य और कल्याण का मार्ग दिखाकर,  मेरे गिरधारी, मेरे मुरारी  बनी रहे  कृपा सदा सब पर तुम्हारी !

डॉ श्लोक

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मेरे प्यारे मेरी आंखों के चमकते तारे, खुशियों से भरा हो हर पल तुम्हारा मेरे राजदुलारे, ऐसा लगता है जैसे कल ही की बात है तुमने की है मेरी उंगली पकड़ कर चलने की शुरुआत है  वो तुम्हारा तुतला कर मुझे पापा कहकर बुलाना मेरे जीवन का है वो अनमोल खजाना यूंही फूलों जैसे महकते रहो हमेशा तुम यूंही सूरज जैसे चमकते रहो सदा तुम चलना है सदा तुमको जीवन के कठिन सत्य पथ पर कभी हारना ना तुम हिम्मत आए राहों में कितनी भी मुसीबत तुमसे ही है हमारे जीवन की हर खुशी बना रहे बाबा विश्वनाथ का सदा तुम पर आशीष ।   

माँ

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माँ मेरी प्यारी माँ,  मेरी दुलारी माँ,  ईश्वर का वरदान हो तुम  इस दुनिया में सबसे महान तुम  ममतामयी सागर की मूरत हो तुम  इस जहान में सब की ज़रूरत हो तुम  धूप में ठंड हवा का झोंका हो तुम दुःख और परशानियों में हमारी ढाल हो तुम  इस संसार में त्याग और निःस्वार्थ प्यार की मिसाल हो तुम  तुम्हारी होने का एहसास आज भी है आशीर्वाद आपका हमारे साथ आज भी है    

मां सिद्धिदात्री

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हे मां सिद्धिदात्री हे मां चारभुजा धारणी  हाथों में शोभित है चक्र, कमल,शंख और गदा  नवमी है दिन नवरात्रि में पूजन का आपका  मंद मंद मुसकान सदा रहती है चेहरे पर आपके  ये रूप सिद्धिदायनी और मोक्षाकरणी है आपके  जो भक्त करते है मन से उपासना और साधना आपकी  उनको कल्याण और सिद्धि प्रदान करती है आप।

महाशिवरात्रि

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आज है शिव की रात्रि  आज है महाशिवरात्रि  हे सोमनाथ हे विश्वनाथ  भस्म को शरीर पे लपेटकर  गंगा को जटाओं में समेटकर चले है मृगछाला लपेटकर  निकले है मेरे भोलेनाथ बारात संग लेकर हे बैद्यनाथ हे केदारनाथ  आज है यह महापर्व  अद्भुत है यह महा शिवरात्रि पर्व  गले में है सर्प और नरमुंडों की माला पीकर विष और भंग का प्याला चले है बाराती प्रेत, पिचाश,राक्षस, गण ,गंधर्व, नाग मतवाला  हे ओंकारेश्वर हे भीमाशंकर मस्तक पर शोभित है चंद्रमा डमरू और त्रिशूल हाथों में बैल पर चढ़कर चले है शिव बारात संग  देवी-देवता सब चले है शिव बारात संग हे महाकालेश्वर हे त्रंबकेश्वर  शिव की लीला देख सब चकराये  मां मैनावती और पिता हिमालय पार्वती पर गुस्साए  क्या यही है वर पुत्री पार्वती का डमरूवाला जिसके लिए गौरी ने किया कठोर तप लाखों वर्षों वाला यह देखकर शिवशंभु मद मंद मन ही मन मुस्कुराए हे घृष्णेश्वर हे नागेश्वर  देख शिव की ये माया  मां गौरी ने पर्वतराज पिता और मां मैना को समझाया यही है त्रिलोकी  त्रिपुरारी जगत के यही है पालनहारी त्रिलोक के  य...