पुराने दिन स्कूल के
वो भी क्या दिन थे यारों , ना कोई चिंता ना कोई फिक्र थी यारों । दोस्तों के साथ करते थे मस्ती खूब यारों , स्कूल में दोस्तों के साथ लंच शेयर करते थे यारों । वो होमवर्क पूरा ना करने पर टीचर का डांटना, स्कूल खत्म होने पर जल्दी घर पहुंचना । गर्मी की छुट्टियों में घूमने जाना , लौटकर दोस्तों को यात्रा वृत्तांत सुनाना। वो आखिर दिन था फेयरवेल का आँखें थी हमारी नम , मुख पर मुस्कुराहट थी मगर दिल में था दोस्तों से बिछड़ने का गम। समय का पहिया तेजी से घूमता गया , सफलता की चाहत में सब कुछ पीछे छूटता गया। जब मंजिल पहुंच कर देखा तो पाया खुद को तन्हा, अकसर याद आते है दोस्तों के संग गुजारे वो यादगार लम्हा।