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Showing posts from May, 2026

वो बचपन

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वो भी क्या दिन थे ऐ यारों, ना चिंता-बोझ सताती थी। दोस्तों के संग बस मस्ती में, स्कूल लंच संग भाती थी।। वो होमवर्क ना करने पर, टीचर की डांट बहुत खाना। स्कूल खत्म हो जाने पर, बस घर पर जल्द पहुंच जाना।। गर्मी की छुट्टी मिलते ही, यात्रा पर शीघ्र निकल जाना। वापस आकर खट्टे-मीठे, दोस्तों को हाल सुना जाना।। वो अंतिम दिन था फेयरवेल का शांत और मायूस थे हम। चेहरे पर थी मुस्कान मगर, अन्तर में था बिछुड़न का गम।। समय का पहिया तीव्र गति से, घूमा और वक्त बदलता गया। सफल होने की चाहत में, बस सबकुछ पीछे छूट गया।। मंजिल पहुंच कर देखा तो, खुद को पाया केवल तन्हा। बस यादें शेष थीं दोस्तों की, जो साथ गुजारे थे लम्हा।।

आदिशक्ति नवदुर्गा मां

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जगत जननि हे मां अम्बे, तुम हो  जग की आदिशक्ति। प्रारंभ हुआ है पर्व आज, है चैत्र शुक्ल नवरात्रि।। हे शिव अर्धांगिनी, शैलसुता, है प्रथम दिवस का रूप आपका। सिंह सवार सुशोभित मां तुम, अनुपम दिव्य स्वरूप आपका।। एक हाथ में है त्रिशूल और दूजे में है पुष्प कमल। हे श्वेतवस्त्रधारिणी माता, तुम्हारी कृपा से जीव सफल।। हे शांति रूप गिरिजा माता, अब दया करें यह करूं याचना। हाथ जोड़ हम विनती करते, शरणागत हो करूं प्रार्थना।। तपधारिणी मां ब्रह्मचारिणी द्वितीय दिवस है आपका। ज्ञानरूपधारिणी माता अज्ञान हरो हम सबका।। एक हाथ में लिए कमंडल और दूजे में माला। ममतामयी हो दिव्य रूप है, अद्भुत तेज निराला।। हे श्वेतवस्त्रधारिणी माता, हे जगजननी करुणा कर दो। तपबल संयम सदाचार और सतपथ ही जीवनपथ हो।। घंटाकार है अर्धचन्द्र, शोभित माथे पर आपके। तृतीय दिवस पर नवरात्रि में पूजन होता आपके।। हे दस भुजा धारिणी माता, सौम्या शांति स्वरूपा। सिंह सवारी, दुग्ध पुष्प फल भोग ही अर्पित होता।। दुष्ट विनाशिनि, भक्ततारिणी माता तेरी जय होवे। हाथ जोड़ हम विनती करते क्षमा दया हम पर होवे।। ब्रह्माण्डजननि मां कुष्मांडा चौथे दिन पूजन होता। ...