आदिशक्ति नवदुर्गा मां

जगत जननि हे मां अम्बे, तुम हो  जग की आदिशक्ति।
प्रारंभ हुआ है पर्व आज, है चैत्र शुक्ल नवरात्रि।।
हे शिव अर्धांगिनी, शैलसुता, है प्रथम दिवस का रूप आपका।
सिंह सवार सुशोभित मां तुम,
अनुपम दिव्य स्वरूप आपका।।
एक हाथ में है त्रिशूल
और दूजे में है पुष्प कमल।
हे श्वेतवस्त्रधारिणी माता,
तुम्हारी कृपा से जीव सफल।।
हे शांति रूप गिरिजा माता,
अब दया करें यह करूं याचना।
हाथ जोड़ हम विनती करते,
शरणागत हो करूं प्रार्थना।।

तपधारिणी मां ब्रह्मचारिणी
द्वितीय दिवस है आपका।
ज्ञानरूपधारिणी माता
अज्ञान हरो हम सबका।।
एक हाथ में लिए कमंडल
और दूजे में माला।
ममतामयी हो दिव्य रूप है,
अद्भुत तेज निराला।।
हे श्वेतवस्त्रधारिणी माता,
हे जगजननी करुणा कर दो।
तपबल संयम सदाचार और
सतपथ ही जीवनपथ हो।।

घंटाकार है अर्धचन्द्र,
शोभित माथे पर आपके।
तृतीय दिवस पर नवरात्रि में
पूजन होता आपके।।
हे दस भुजा धारिणी माता,
सौम्या शांति स्वरूपा।
सिंह सवारी, दुग्ध पुष्प फल भोग ही अर्पित होता।।
दुष्ट विनाशिनि, भक्ततारिणी
माता तेरी जय होवे।
हाथ जोड़ हम विनती करते
क्षमा दया हम पर होवे।।

ब्रह्माण्डजननि मां कुष्मांडा
चौथे दिन पूजन होता।
हे अष्टभुजाधारिणि प्रकाश
त्रैलोक्य प्रकाशित होता।।
आरोग्यदायिनी सुख प्रदायिनी
छप्पन भोग चढ़ाएं।
चरण कमल में शीश नवाकर
दया की भिक्षा पाएं।।

देवमातु स्कंदमातु
पंचम दिन पूजन होता।
हे जन्मदात्री करुणामयी मां
तुम कार्तिकेय की हो माता।। _
_ आप माहेश्वरी पारवती
हे सिंहवाहिनी चतुर्भुजी।
एक हाथ स्कंद दूजे में वरमुद्रा और दो हाथों में कमल सजी।।
आराधना से हो प्रसन्न
भक्तों का दुःख हर लेती।
ज्ञान, भक्ति और बुद्धि का
भण्डार हृदय में भर देती।।

हे कात्यायनी मां महिषासुरमर्दिनी
षष्ठी दिवस को पूजा होती।
सिंह सवारी चतुर्भुजी मां
पापहारिणी दुःखनाशिनी।।
त्रिदेवों के तेजपुंज से
अवतरित हुई धरती पर आप।
जगत की रक्षा करने आयीं
असुरों का करके विनाश।।
हाथ जोड़ कर करें प्रार्थना
हमको शक्ति देना।
मेरे दोष क्षमा करना
कभी भूल से भूल न हो मां।।

कालरात्रि मां संकटहारिणि
सप्तम दिवस में होती पूजा।
तव नौ रूपों का ध्यान धरूं
और पूजूं देव न दूजा।
जय त्रिनेत्रधारिणी
हे रक्तबीज संहारिणी।
हे चंडमुंडमर्दिनी और
अंधकार विनाशिनी।।
हे खड्ग खप्पर धारिणी
हे मातु भवानी कल्याणी।
शक्तिस्वरूपा जगदव्यापिनी
नमामि नमामि नमामि नमामी।।

महागौरी मां श्वेताम्बरी
अष्टम तिथि को पूजा तेरी।
वृषभ सवारी स्नेह भरी
ध्याऊं तुझे मां ममतामयी।।
दयाशील मां चतुर्भुजी
सब करें आज कन्यापूजन।
श्रीचरणों में शीश झुकाकर
ध्यान धरें हम सभी भक्तजन।।

हे सिद्धिदात्री जय मां अम्बे
तुम रिद्धि सिद्धि प्रदायिनी हो।
नवम दिवस पूजन करते
तुम सुख समृद्धि प्रदायिनी 
हो।।
हे वरदात्री मां दुःख निवारिणि मंद मंद मुस्कान लिए।
नहीं रहा जाता मां तुम बिन
चरण कमल का ध्यान किए।।



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