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*नवम दिवस मां सिद्धिदात्री वंदना*

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हे मां सिद्धिदात्री, हे मां वरदायानी हे मां सुखप्रदायिनी, हे मां भक्त कल्याणिनी कृपा हो जब आपकी माँ, जीवन खिल जाता है, बिगड़ा हुआ हर काम भक्तों का, पल में बन जाता है। दुख-दर्द सब मिट जाते हैं, मन को चैन मिल जाता है, जो भी द्वार तुम्हारे आये, वो खाली न जाता है। हे माँ दुर्गे, हे माँ अम्बे, हम सब तेरा ध्यान धरें, सिद्धि दे, वर दे, सुख दे, हर भक्त का कल्याण करें।

*अष्टम दिवस अधिष्ठात्रि - माँ महागौरी वंदना *

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हे मां महागौरी, हे मां जगतजननी, हे दयामयी, हे सुखदायनी, हे अष्टम दिवस की अधिष्ठात्री  । श्वेत वस्त्र धारिणी, वृषभ वाहिनी, करुणामयी रूप है, पाप नाशिनी। तप से है उज्ज्वल तेरा गौर वर्ण, तेरे आशीष से मिटे जीवन के हर कष्ट हर्ण। डमरू त्रिशूल धारिणी, हे मां मंगलकारिणी, शरण में आए जो, उनकी हो उद्धारिणी। जय माता दी 🙏

* सप्तम दिवस माँ कालरात्रि वंदना *

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हे मां कालरात्रि, हे मां जीवनदात्री, हे मां आदिशक्ति, हे मां दैत्यविनाशनी। करती हो रक्षा सदा अपने भक्तों की, सुन के पुकार अपने भक्तन की। हे मां अंधकार विनाशिनी, हे मां ज्योति स्वरूपा, तेरे चरणों में झुके हैं सारे ब्रम्हा, विष्णु, भोले रूपा। गर्दभ वाहिनी, शुभंकरी, हे मां भयहारिणी, तेरे आशीष से मिट जाती हर पीड़ा जीवन की।

* सप्तम दिवस माँ कालरात्रि वंदना *

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हे मां कालरात्रि, हे मां जीवनदात्री, हे मां आदिशक्ति, हे मां दैत्यविनाशनी। करती हो रक्षा सदा अपने भक्तों की, सुन के पुकार अपने भक्तन की। हे मां अंधकार विनाशिनी, हे मां ज्योति स्वरूपा, तेरे चरणों में झुके हैं सारे ब्रम्हा, विष्णु, भोले रूपा। गर्दभ वाहिनी, शुभंकरी, हे मां भयहारिणी, तेरे आशीष से मिट जाती हर पीड़ा जीवन की।

षष्ठी दिवस *माँ कात्यायनी वंदना *

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हे मां कात्यायनी, हे माँ दिव्य रूप धारिणी, हे मां कल्याणिनी, हे माँ सुखप्रदायिनी। हे माँ सिंह वाहिनी, हे माँ असुर संहारिणी, हे माँ भव-तारिणी, हे माँ जग-उद्धारिणी। तेरे चरणों में झुके, सारा संसार है, तेरी कृपा से ही तो, होता बेड़ा पार है। जो भी द्वार तेरे आए, खाली न जाए, तेरी ममता की छाया में, सब दुख मिट जाए।

*पंचम दिवस मां स्कंदमाता वंदना - हे माँ ममतामयी*

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हे माँ स्कंदमाता, हे माँ कार्तिकेय की माता, हे माँ ममतामयी, हे माँ जगजननी, तेरे चरणों में शीश झुकाऊँ, हे माँ मोक्ष दायिनी। चार भुजाओं वाली माता, स्कंद को गोद लिए, एक हाथ में कमल सुशोभित, दूजे से वर दिए, तीसरी भुजा से थामे स्कंद को, चौथी से अभय किए, तेरे मुख पर तेज निराला, भक्तों के कष्ट हरे। जो भी तेरा ध्यान लगाए, ज्ञान और बुद्धि पाए, निर्बल को बल देती माता, मूढ़ को ज्ञानी बनाए, संतान सुख की दाता माता, सूनी गोद भरे, तेरी ममता का आँचल पाकर, हर जीवन संवर जाए। हे माँ स्कंदमाता, आओ, मेरे घर आंगन में, ज्योति जला कर रखी है, मैं तेरे इंतजार में, मेरी विनती सुन लो माता, मुझे अपने चरणों में रख लो, हर जन्म में तेरी सेवा करूँ, ऐसा वरदान दे दो।

*चतुर्थ दिवस - माँ कूष्माण्डा वंदना*

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हे माँ कूष्माण्डा, हे चतुर्थ दिवस पूजनीय माँ, अद्भुत तेज है आपका, हे रोग विनाशिनी माँ। आपकी मुस्कान से ब्रह्माण्ड बना है, आपके तेज से ही सृष्टि सजा है, अष्टभुजा धारिणी, सिंह सवारी, सब रोगों को हरने वाली। हाथों में चक्र, गदा, कमल शोभित, अमृत कलश से करती रोग मोचित, मंद-मंद हँस कर सृष्टि रचाई, अपनी माया से दुनिया सजाई। आप ही हो आदि-शक्ति, अनादि माया, आपकी कृपा से ही चलती है काया, जो भी सच्चे मन से ध्याता, उसे आरोग्य और आयु मिल जाता। अनाहत चक्र की तुम स्वामिनी, सकल जगत की कल्याणकारिणी, हे माँ कूष्माण्डा कृपा कर जाना, हम भक्तों को निरोग कर जाना। *जय माँ कूष्माण्डा।*