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अनाड़ी

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 अजीब सी कश्मकश में हू  समझ नही आ रहा हैं कैसे कहूं  यह कैसी भूल भुलैया है  मानो चल रही शनि की ढैय्या है  कोई रास्ता सूझता नहीं है  कोई मंजिल दिखाता नही है  यह दुनिया भी कितनी  है अजीब सी  लोगो को बदलते हुवे देखा करीब से जिन पर सब कुछ लुटाया उन्ही लोगो ने हमको भुलाया लिया है मुंह हमसे मोड़  चल दिए है हमको छोड़  इस उलझन से निकलना है बेहतर   यहां से अब निकल चलना है बेहतर कही तो सपनों की मजिल नई मिलेगी नई उम्मीदों की दुनिया फिर से सजेगी  

शिव कृपा

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हे देवाधिदेव, हे महादेव आप  ही हो इस जग के पितृदेव आपसे ही है इस जगत का जीवन आपसे ही है इस जगत का सृजन जब जब इस दुनिया पर संकट आया आप ने इस सृष्टि की रक्षा का दायित्व निभाया आप ही हो आदिशक्ति जगत जननी के पति जिनके नौ रूपों का वर्णन है अदभुत अद्वितीय आप के है पुत्र  कार्तिकेय और गणेश  जिनकी कृपा आप के भक्तो पर है विशेष  अपने पी के विष समुद्र मंथन का की थी रक्षा इस संपूर्ण सृष्टि का हे प्रभु आप को है शत शत नमन  शिवरात्रि के इस पावन अवसर पर हे प्रभु रखना बनाए अपनी कृपा   हम सब भक्त जनों पर सर्वदा ।

निरुत्तर

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आज सुबह जैसे ही निकला घर से  एक बच्ची मिल गई खड़ी घर के गेट पे उसकी सहमी आंखे कुछ बोल रही थी न जाने क्यों कुछ कहना चाह रही थी जैसे ही उसकी नजर मुझ्से टकराई उसने भरे गले से अपनी कहानी बताई नही रहे पिता उसके इस दुनिया में अब वो मदद मांग रही है सब लोगो से अब   देख रही थी इक  उम्मीद आंखों में  मैं भी था बाहर जाने की हड़बड़ी में न पूछ सका बच्ची से उसके हालात के बारे में दिन भर सोचता रहा बस उस बच्ची के बारे में क्या कुछ रूपये से हो जायेगी मदद उनकी क्या आसान हो जाएगी जीवका उनकी कहते है ईश्वर जो भी करता है अच्छा करता है न जाने ईश्वर कभी कभी ऐसा क्यो करता है इसमें जाने क्या अच्छा  दिखाया है एक बच्ची ने अपने पिता को खोया है मैने ऊपर आसमां में सवाली  नजरों से देखा  ऊपर वाले को भी बेबस और लाचार देखा।

भइया ये अपनी काशी है

ये काशी  है भईया ये  वाराणसी है बाबा विश्वनाथ की आलौकिक नगरी है महिमा इसकी अद्भुत और निराली है अनेक महापुरुषों की यह कर्मस्थली है बहता है यहां गंगा जी का निर्मल जल नगरी है यह मोक्ष पाने का अनुपम स्थल  यह शहर कहलाता है घाटों का शहर मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट है यही पर मंदिर है यहां शक्तिपीठ मां विश्लाक्षी का रास्ता है माता विंधयावासनी का यहां से कुछ दूर का लिखी थी महान रामचरितमानस यही पर कवि तुलसीदास ने यही अस्सी घाट पर  संकटमोचन ,दुर्गाकुंड और काल भैरव मंदिर है यहा प्रसिद्  काशी हिंदू  विश्वविद्यालय है यहां का विश्वप्रसिद्ध वो सुबह शाम उगते डूबते सूरज को घाटों से निहारना  वो घाटों पे बैठकर यहां के मनोहर दृश्य को देखना वो शाम की गंगा जी की आरती का आनंद वो संध्या के गंगा जी में नौका विहार का आनंद  वो यहां की कचौरी और जलेबी का स्वाद वो लॉगलता और बनारसी पान का स्वाद वो गोदौलिया की प्रसिद्ध ठंडई का मजा वो विश्वप्रसिद्ध बानारसी साड़ी बनती है यहां  वो बनारस के भूल भुलैया गलियों का  जाल वो यहां की विश्व प्रसिद्ध संगीत घराने की सुर ताल  यह...

गणतंत्र दिवस

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आज दिवस है बहुत महत्वपूर्ण आज मिला था हम को सम्पूर्ण  आज है हमारा गणतंत्र दिवस मानते है २६ जनवरी को हर वर्ष आज मिला था देश को  एक नया विधान जिसको कहते है हम हमारा अपना संविधान  किया संघर्ष और दिया बलिदान हमारे वीरों ने  तब जाके देखा एक नया सवेरा हम सब लोगो ने आज के दिन देश के प्रथम राष्ट्रपति  डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने  फहराया था तिरंगा बड़े शान से इरविन स्टेडियम में  यह दिवस हर वर्ष है राष्ट्र पर्व के रूप में हम मानते  इस दिवस पर अब राष्ट्रपति राजपथ पर झंडा है फहराते यह दिवस हमारी एकता में अनेकता को है दर्शाता यह दिवस हमारे मूल अधिकारों को है हमको समझाता  आओ हम सब मिलकर ले ये प्रण हम   झुकने न देंगे अपने तिरंगे का मान हम  ।

स्वामी विवेकानंद

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हुआ था जन्म एक बालक का  करने आया था कल्याण विश्व का  नाम था नरेंद्र नाथ दत्त उनका बचपन से था लगाव अध्यात्म में उनका गुरु थे उनके महान संत श्रीं रामकृष्ण जी  थे अति प्रिय गुरू को स्वामी विवेकानंद जी गुरु के आदर्शों से प्रेरित था उनका जीवन कर दिया था अपने को समाज के लिए अर्पन पच्चीस वर्ष के आयु मे गेरुआ वस्त्र धारण कर और निकल पड़े सम्पूर्ण विश्व भ्रमण पर चले विश्व को वेदांत दर्शन का पाठ पढ़ाने भारतीय दर्शन और अध्यात्म का महत्व समझाने शिकागो में फहराया परचम भारतीय सनातन धर्म का किया मंत्रमुग्ध अपने भाषण से वहा उपस्थित श्रोतागण का  वेदांत दर्शन को विश्व के हर कोने कोने में पहुंचाया लोगो को जीवन जीने का नया मार्ग दिखलाया देश के स्वंत्रता आंदोलन में दिया महत्वपूर्ण योगदान करते रहेंगे सदा हम सब उन पर  हमेशा अभिमान किया विरोध पाखंडों और सामाजिक कुरीतियों  का  और किया स्थापना रामकृष्ण मिशन का  जीवन में शिक्षा और सामाजिक सेवा महत्व को बतलाया अपने रचनाओं के माध्यम से सब लोगो को जगाया दिया त्याग अपने शरीर को 39 वर्ष की अल्पायु में किया महान कार्य जो कोई कर न ...

मुकद्दर

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जब हम पहली बार तुमसे मिले थे दिल में अरमान बहुत सारे  खिले थे फिर हमारे मिलने का सिलसिला ऐसा शुरू हुआ जैसे पतझड़ के बाद फूलों का खिलना शुरू हुआ जिंदगी बहुत खुशनुमा सी हो गई थी ऐसा लग रहा था सारी दुनिया मिल गई थी अचानक इक तूफान आया जीवन में उड़ा ले गया सब कुछ अपने संग में उजड़ गया घर हमारा बसने से पहले डूब गई किश्ती किनारे पे पहुंचने से पहले जिंदगी ऐसे मोड़ पे हमें ले आई जहां हर तरफ है बेबसी और तन्हाई  अब हो हालत ऐसा हो गया है हमारा  जुबां पे जिक्र भी न कर सकते है तुम्हारा ।