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Showing posts from August, 2026

पंचामृत

*पंचामृत - धरती का जयघोष* *॥ मंगलाचरण ॥*   वन्दे मातरं धरणीं, पंचतत्व समन्विताम्।   जल वायु अग्नि भूमि व्योम, रक्षन्तु जगत त्रयम्॥   सीता राम हृदि ध्यायन्, धरा रक्षा व्रतं चरेत्।   हरित भारत सिद्ध्यर्थं, कविता वाणीमुदीरयेत्॥ *॥ कविता ॥*   धरा करे पुकार अति, सुनो सकल संसार।   पंचतत्व रक्षा बिना, नहिं जीवन आधार॥ जल बिन सूना जगत है, जल ही प्राण समान।   सरिता, सागर, सरवर को, दो निर्मल सम्मान॥ वायु बिन नहिं श्वास है, विष बुझाए प्राण।   वृक्ष लगाओ घर-घर में, फैले हरित विधान॥ अग्नि सौर का रूप है, ऊर्जा दे अपार।   पवन, सूरज संग मिले, मिटे अंधकार॥ गन करे आक्रोश अति, ताप बढ़े दिन-रात।   जलवायु बदली देख के, काँपे जगत के गात॥ हिमगिरि रोए नित्य ही, पिघले हिम के माथ।   प्रलय बुलाए आपदा, यदि न थामा हाथ॥ प्लास्टिक, विष, धुआँ तजो, माँ धरती को तारो।   रीसाइकल का मंत्र जपो, कचरा कम निहारो॥ पंचामृत ये तत्व हैं, जल वायु अग्नि, भूमि, व्योम।   इनकी रक्षा धर्म है, यही सनातन सोम॥ आज ...

पिताजी

उंगली पकड़कर जिन्होंने मुझे चलना सिखाया, गिरकर हर बार संभालना और उठना सिखाया। अपनी धूप छुपाकर जो मुझे छांव देते हैं, वो और कोई नहीं, मेरे पापा कहलाते हैं। ​अपनी खुशियों को भुलाकर मेरी हर ज़िद पूरी करते है कभी जताते नहीं, पर मेरे आंसुओं से उन्हें तकलीफ होती है। खुद के छाले छुपाकर जो मेरे तलवे सहलाए, वो पिता ही है, जो हर दर्द में भी मुस्कुराए। जिनके मजबूत कंधों पर बैठकर देखी मैंने दुनिया सारी, उनकी सादगी और डांट में भी छुपी है ममता न्यारी। ​जब भी कभी डगमगाए कदम या हौसला टूटा, उन्होंने हाथ थामकर कहा—"तू हिम्मत मत छोड़ना बेटा"। मेरी हर छोटी जीत पर जो सबसे ज्यादा मुस्कुराते हैं, वो पापा ही हैं, जो बिना कहे सब कुछ कर जाते हैं। उनकी आँखों के सपनो में है मेरी कामयाबी का घर, वो ढाल बनकर खड़े हैं, तो फिर मुझे किसका डर? ​वो घर की छत हैं, जो हर आंधी-तूफ़ान को सहती है, उनकी छत्रछाया में ही तो मेरी दुनिया सुरक्षित रहती है। आप सिर्फ मेरे पिता नहीं, मेरे  सबसे बड़े अभिमान हो, सच कहूं तो पापा, आप ही मेरी पूरी जान हो।

मां

मां कुदरत का अनमोल खजाना है ममता का ईश्वर का अद्भुत नजराना है। जीवन में चाहे हो कितने दुख और परेशानी , चेहरे पर सदा दिखती है मुस्कुराहट उनकी ।। जीवन की हर एक परीक्षा , हंस कर करती है उत्तीर्ण हमेशा। राह की हर मुश्किल और रुकावट, सदा आगे रहकर करती हो सामना बिना थकावट।। हे मां प्यारी मां तुम हो जग की सबसे न्यारी मां।। यूंही बना रहे तुम्हारा आशीर्वाद सदा , ईश्वर की प्रतिमूर्ति बनकर हमे दिखाना मार्ग सदा।।

खामोश मेहनत

​मैंने रातों को दिन में बदला, हर पन्ने को परिश्रम से लिखा। कंपनी डेडलाइन के लिए परिवार को भूला, हर जिम्मेदारी को ईमानदारी से निभाया।। ​मैनेजमेंट की आंखें तलाशें, सिर्फ वही जो शोर मचाए। मेरी खामोश कोशिशों को, किसी ने पलट कर न सराहे।। ​पर मलाल नहीं है मुझको, मेरा काम ही पहचान है। जो आज नज़रअंदाज़ हुआ, वो कल की सबसे बड़ी उड़ान है।। ​क्योंकि सच्ची लगन का शोर नहीं होता, और कठिन परिश्रम का कोई मोल नहीं होता। हम तो वो हैं जो खामोशी से अपना काम करते, कुछ लोग ऐसे हैं जो सिर्फ काम की फिक्र करके ज़िक्र करते हैं।। ​यही तो दस्तूर है आज की दुनिया का, अक्सर वो लोग पिछड़ जाते हैं जो करते काम बिना शोर कंपनी का।।