खामोश मेहनत


​मैंने रातों को दिन में बदला,
हर पन्ने को परिश्रम से लिखा।
कंपनी डेडलाइन के लिए परिवार को भूला,
हर जिम्मेदारी को ईमानदारी से निभाया।।

​मैनेजमेंट की आंखें तलाशें,
सिर्फ वही जो शोर मचाए।
मेरी खामोश कोशिशों को,
किसी ने पलट कर न सराहे।।

​पर मलाल नहीं है मुझको,
मेरा काम ही पहचान है।
जो आज नज़रअंदाज़ हुआ,
वो कल की सबसे बड़ी उड़ान है।।

​क्योंकि सच्ची लगन का शोर नहीं होता,
और कठिन परिश्रम का कोई मोल नहीं होता।
हम तो वो हैं जो खामोशी से अपना काम करते,
कुछ लोग ऐसे हैं जो सिर्फ काम की फिक्र करके ज़िक्र करते हैं।।

​यही तो दस्तूर है आज की दुनिया का,
अक्सर वो लोग पिछड़ जाते हैं जो करते काम बिना शोर कंपनी का।।

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