पिताजी
उंगली पकड़कर जिन्होंने मुझे चलना सिखाया,
गिरकर हर बार संभालना और उठना सिखाया।
अपनी धूप छुपाकर जो मुझे छांव देते हैं,
वो और कोई नहीं, मेरे पापा कहलाते हैं।
अपनी खुशियों को भुलाकर मेरी हर ज़िद पूरी करते है
कभी जताते नहीं, पर मेरे आंसुओं से उन्हें तकलीफ होती है।
खुद के छाले छुपाकर जो मेरे तलवे सहलाए,
वो पिता ही है, जो हर दर्द में भी मुस्कुराए।
जिनके मजबूत कंधों पर बैठकर देखी मैंने दुनिया सारी,
उनकी सादगी और डांट में भी छुपी है ममता न्यारी।
जब भी कभी डगमगाए कदम या हौसला टूटा,
उन्होंने हाथ थामकर कहा—"तू हिम्मत मत छोड़ना बेटा"।
मेरी हर छोटी जीत पर जो सबसे ज्यादा मुस्कुराते हैं,
वो पापा ही हैं, जो बिना कहे सब कुछ कर जाते हैं।
उनकी आँखों के सपनो में है मेरी कामयाबी का घर,
वो ढाल बनकर खड़े हैं, तो फिर मुझे किसका डर?
वो घर की छत हैं, जो हर आंधी-तूफ़ान को सहती है,
उनकी छत्रछाया में ही तो मेरी दुनिया सुरक्षित रहती है।
आप सिर्फ मेरे पिता नहीं, मेरे
सबसे बड़े अभिमान हो,
सच कहूं तो पापा, आप ही मेरी पूरी जान हो।
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