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मां

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        मां रख कर नौ माह गर्भ में  दिया जन्म हर दर्द सह के नए दुनिया में आगमन में जीवन पथ के कठिन सफर में  जीवनदयानी जननी आप ही हो हे मां प्रथम गुरु हमारी आप ही हो  पकड़ के उंगली चलना सिखाया आपने पकड़ उंगली लिखना सिखाया आपने हमारे खुशियों और सपनों को पूरा करने में  भूल गई मां अपने सब सपनों और खुशियों को आंचल आप का होता है  दुनिया में सबसे सुरक्षित जिसकी छाव में हम हो जाते है   आकर सब परेशानियों से निश्चिंत रहती हो हमेशा मुस्कराती  अपने दुखों को छिपाकर इच्छाओं को हमेशा सवारती  कितने ही कष्टों को उठाकर  हे मां आप का यह निस्वार्थ प्रेम इस दुनिया में है सबसे अनमोल चुका नही सकते कभी जीवन में हम सब कुछ देकर भी हम उसका मोल। वो इस दुनिया में बहुत खुशनसीब है  जिनको मां का साया हमेशा नसीब है हे जननी आप धन्य हो। हे मां आपको सत सत नमन है।

जाल

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उम्मीदों के सफर पे , मंजिल की तलाश  में , उलझ गए है इस कदर हम, नए आशियाने की आस में।

गुरुदेव

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हे गुरुदेव आप को है सादर नमन हे गुरुदेव करते है हम आपका चरण वंदन बचपन से था शौक आपको काव्य रचना का  अद्भुत प्रतिभा का संगम था व्यक्तिव गुरुदेव का गुरुदेव ने दिया विश्व को कालजयी  गीतांजलि का उपहार जिसके लिये गुरुदेव को मिला विश्व प्रसिद्ध नोबेल पुरुस्कार समाज सेवा और आधुनिक शिक्षा के थे पक्षधर  सम्पूर्ण जीवन किया कला और देश को समर्पण  आइंस्टीन और गांधी जी थे गुरुदेव के प्रिय मित्र किया बांग्ला साहित्य से इस विश्व को उपकृत  उनकी दो गीतों को था मिला गौरव  दो देशों के राष्ट्रगान का आमार सोनार बांग्ला और जन गण मन है राष्ट्रगान बांग्लादेश और हिंदुस्तान का।

आस

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  चलो कहीं दूर चले हम जहां पे ना हो कोई गम खुला नीला अंबर हो वहां पे  जहां वो मिल रहा हो जाके धरा से न अपनो से गिला शिकवा होगा न  कोई अपनो से रुसवा होगा न इन आंखों में कोई आंसू होंगे न उम्मीदों के किले धरासायी होगे आ चले चल मंजिल की तलाश में  इक नया आशियाना बनाने आस में।

फासले

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वक्त का अब तो आसरा है हमे  कोशिश तो बहुत की हमने मगर    मंजिल के करीब जाके भी हम न जाने क्यों अब भी बहुत दूर है हम ।

नव आरंभ

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आज था सुअवसर बेटे का  नए स्कूल में प्रथम प्रवेश का सभी बच्चों की आंखों में थी इक उत्सुकता नन्ही आंखों में थी नए सफर पर चलने की आतुरता  अभिभावको के चेहरे पे थी उम्मीदों की इक चमक उनके यह बच्चे है करेंगे उनके सपनों को हकीकत  तभी स्कूल के प्रिंसिपल ने बोला मुस्कुराकर  यह स्कूल है बच्चो के नए सफर का इक अवसर यहां से सीखेंगे ये नए जीवन की शिक्षा कैसे सामंजस्य है करना लेंगे इसकी दीक्षा  रखना है बच्चों को मोबाइल फोन से दूर इसके लिए हमको देना होगा समय भरपूर अब तो एकाकी परिवार का है जमाना बच्चों के लिए जरूरी है माता पिता का साथ होना।

शून्यता

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            आज जब तुम्हारा जिक्र आया वो कॉलेज के दिन मुझे याद आया वो भी क्या दिन थे हमारे  जो वक्त थे हमने साथ गुजारे जेब में पैसे कम थे जरुर  मगर दोस्तों के लिए था समय भरपूर आज तो पास है सब कुछ हमारे लेकिन अब वो दोस्त साथ न रहें हमारे।