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कान्हा

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मेरे कृष्णा, मेरे गोपाला,मेरे कान्हा  लेकर विष्णु अवतार पृथ्वी पर जन्मा, करने कल्याण सृष्टि का  देने जग को ज्ञान गीता का , मां देवकी का दुलारा मां यशोदा की आंखों का तारा, गोकुल की अद्भुत बाल लीला  माटी खा ब्रह्मांड दिखाया,मेरे गोपाला, मेरे माखनचोर, मेरे गिरधारी  मेरे नंदलाला ,मेरे मोर मुकुटधारी,   कलिया को नाथा,गोवर्धन पर्वत को कनिष्ठा पे उठाया कंस के अत्याचारों से जग को मुक्ति दिलाया , मुरली की मधुर धुन से जग हुआ मोहित  गोपियां के संग रास लीला ने किया सम्मोहित  राधा कृष्ण प्रेम की अद्भुत पराकाष्ठा  आध्यात्मिक प्रेम की अमर गाथा, विश्व को भक्ति,ज्ञान और कर्म योग का मार्ग दिखाकर  गीता का अद्भुत ज्ञान बताकर  धर्म पथ पर चलना सिखलाकर सबको सत्य और कल्याण का मार्ग दिखाकर,  मेरे गिरधारी, मेरे मुरारी  बनी रहे  कृपा सदा सब पर तुम्हारी !

डॉ श्लोक

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मेरे प्यारे मेरी आंखों के चमकते तारे, खुशियों से भरा हो हर पल तुम्हारा मेरे राजदुलारे, ऐसा लगता है जैसे कल ही की बात है तुमने की है मेरी उंगली पकड़ कर चलने की शुरुआत है  वो तुम्हारा तुतला कर मुझे पापा कहकर बुलाना मेरे जीवन का है वो अनमोल खजाना यूंही फूलों जैसे महकते रहो हमेशा तुम यूंही सूरज जैसे चमकते रहो सदा तुम चलना है सदा तुमको जीवन के कठिन सत्य पथ पर कभी हारना ना तुम हिम्मत आए राहों में कितनी भी मुसीबत तुमसे ही है हमारे जीवन की हर खुशी बना रहे बाबा विश्वनाथ का सदा तुम पर आशीष ।   

माँ

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माँ मेरी प्यारी माँ,  मेरी दुलारी माँ,  ईश्वर का वरदान हो तुम  इस दुनिया में सबसे महान तुम  ममतामयी सागर की मूरत हो तुम  इस जहान में सब की ज़रूरत हो तुम  धूप में ठंड हवा का झोंका हो तुम दुःख और परशानियों में हमारी ढाल हो तुम  इस संसार में त्याग और निःस्वार्थ प्यार की मिसाल हो तुम  तुम्हारी होने का एहसास आज भी है आशीर्वाद आपका हमारे साथ आज भी है    

मां सिद्धिदात्री

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हे मां सिद्धिदात्री हे मां चारभुजा धारणी  हाथों में शोभित है चक्र, कमल,शंख और गदा  नवमी है दिन नवरात्रि में पूजन का आपका  मंद मंद मुसकान सदा रहती है चेहरे पर आपके  ये रूप सिद्धिदायनी और मोक्षाकरणी है आपके  जो भक्त करते है मन से उपासना और साधना आपकी  उनको कल्याण और सिद्धि प्रदान करती है आप।

महाशिवरात्रि

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आज है शिव की रात्रि  आज है महाशिवरात्रि  हे सोमनाथ हे विश्वनाथ  भस्म को शरीर पे लपेटकर  गंगा को जटाओं में समेटकर चले है मृगछाला लपेटकर  निकले है मेरे भोलेनाथ बारात संग लेकर हे बैद्यनाथ हे केदारनाथ  आज है यह महापर्व  अद्भुत है यह महा शिवरात्रि पर्व  गले में है सर्प और नरमुंडों की माला पीकर विष और भंग का प्याला चले है बाराती प्रेत, पिचाश,राक्षस, गण ,गंधर्व, नाग मतवाला  हे ओंकारेश्वर हे भीमाशंकर मस्तक पर शोभित है चंद्रमा डमरू और त्रिशूल हाथों में बैल पर चढ़कर चले है शिव बारात संग  देवी-देवता सब चले है शिव बारात संग हे महाकालेश्वर हे त्रंबकेश्वर  शिव की लीला देख सब चकराये  मां मैनावती और पिता हिमालय पार्वती पर गुस्साए  क्या यही है वर पुत्री पार्वती का डमरूवाला जिसके लिए गौरी ने किया कठोर तप लाखों वर्षों वाला यह देखकर शिवशंभु मद मंद मन ही मन मुस्कुराए हे घृष्णेश्वर हे नागेश्वर  देख शिव की ये माया  मां गौरी ने पर्वतराज पिता और मां मैना को समझाया यही है त्रिलोकी  त्रिपुरारी जगत के यही है पालनहारी त्रिलोक के  य...

मां महागौरी

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हे मां महागौरी  हे मां कोशिकी नवदुर्गा में अष्टम है आप महादेव की गौरी है आप श्वेत रंग की है पूजन में महत्वत्ता  नवरात्रि में महाअष्टमी दिन है आपका  हे चार भुजा धारणी  भक्तों की दुखहरिणी  हे कल्याणकारिणी हे स्नेहमयी हे मां शाकंभरी  हे मां ममतामयी  सर्वत्र हो मां आप ही विराजमान  आप के चरणों में है बार बार प्रणाम। श्वेताम्बर 

मां कालरात्रि

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हे मां कालरात्रि  हे मां आदिशक्ति  सप्तमी दिन है नवरात्रि में आपका  हस्त चार और त्रिनेत्र है आपका  दुष्टों का करती हो सर्वनाश  भक्तों की हो आप रक्षा की आस मन में लेकर हमेशा यह विश्वास  आपके दरबार में लगाते हैं अरदास।