*चतुर्थ दिवस - माँ कूष्माण्डा वंदना*


हे माँ कूष्माण्डा, हे चतुर्थ दिवस पूजनीय माँ,
अद्भुत तेज है आपका, हे रोग विनाशिनी माँ।

आपकी मुस्कान से ब्रह्माण्ड बना है,
आपके तेज से ही सृष्टि सजा है,
अष्टभुजा धारिणी, सिंह सवारी,
सब रोगों को हरने वाली।

हाथों में चक्र, गदा, कमल शोभित,
अमृत कलश से करती रोग मोचित,
मंद-मंद हँस कर सृष्टि रचाई,
अपनी माया से दुनिया सजाई।

आप ही हो आदि-शक्ति, अनादि माया,
आपकी कृपा से ही चलती है काया,
जो भी सच्चे मन से ध्याता,
उसे आरोग्य और आयु मिल जाता।

अनाहत चक्र की तुम स्वामिनी,
सकल जगत की कल्याणकारिणी,
हे माँ कूष्माण्डा कृपा कर जाना,
हम भक्तों को निरोग कर जाना।

*जय माँ कूष्माण्डा।*

Comments

Popular posts from this blog

कान्हा

गणेश चतुर्थी

महापर्व है महाव्रत का