*द्वितीय दिवस - माँ ब्रह्मचारिणी वंदना*


हे माता ब्रह्मचारिणी,
द्वितीय स्वरूप धारिणी,
शांत सौम्य स्वरूप है आपका,
तप का तेज अनूप है आपका।

एक हाथ में जप की माला,
दूजे में कमंडल, रूप निराला,
श्वेत वस्त्र धारिणी माता,
भक्तों को ज्ञान सिखलाती माता।

घोर तपस्या आपने की थी,
शिव को पाने की जिद ली थी,
हजारों वर्षों तक तप करके,
प्रेम की परिभाषा लिख दी थी।

त्याग और संयम की देवी,
साधना की आप ही सेवी,
जो भी आपको सच्चे मन से ध्याता,
उसे सिद्धि और धैर्य मिल जाता।

हम भी शीश झुकाते हैं,
चरणों में ध्यान लगाते हैं,
हे ब्रह्मचारिणी माँ कृपा कर जाना,
भक्तों में तप का बल भर जाना।

*जय माँ ब्रह्मचारिणी।*

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