हे विघ्नहर्ता, हे एकदंत शिव गौरी के दुलारे आप है दयावंत हे सिद्धिविनायक ,हे गणाध्यक्ष है सभी देवताओं में आप सर्वश्रेष्ठ हे भालचंद्र ,हे गजानन आप को है मेरा सादर नमन हे सुमुख, हे गजकर्णक होती है पूजा आपकी सर्वप्रथम चाहे हो विद्यारम्भ या हो विवाह के पूजन के प्रथम आप ही है सब देवताओं में प्रथम हे कपिल ,हे धूम्रकेतु आप को प्रिय है मोदक और लड्डू हे विकट, हे लंबोदर आप लेते है भक्तो के कष्टों को हर हे विघ्न-नाश , हे प्रभु जिसने किया यह व्रत गणेश चतुर्थी का भर देते है प्रभु सुख और समृद्धि से जीवन उसका।
मेरे कृष्णा, मेरे गोपाला,मेरे कान्हा लेकर विष्णु अवतार पृथ्वी पर जन्मा, करने कल्याण सृष्टि का देने जग को ज्ञान गीता का , मां देवकी का दुलारा मां यशोदा की आंखों का तारा, गोकुल की अद्भुत बाल लीला माटी खा ब्रह्मांड दिखाया,मेरे गोपाला, मेरे माखनचोर, मेरे गिरधारी मेरे नंदलाला ,मेरे मोर मुकुटधारी, कलिया को नाथा,गोवर्धन पर्वत को कनिष्ठा पे उठाया कंस के अत्याचारों से जग को मुक्ति दिलाया , मुरली की मधुर धुन से जग हुआ मोहित गोपियां के संग रास लीला ने किया सम्मोहित राधा कृष्ण प्रेम की अद्भुत पराकाष्ठा आध्यात्मिक प्रेम की अमर गाथा, विश्व को भक्ति,ज्ञान और कर्म योग का मार्ग दिखाकर गीता का अद्भुत ज्ञान बताकर धर्म पथ पर चलना सिखलाकर सबको सत्य और कल्याण का मार्ग दिखाकर, मेरे गिरधारी, मेरे मुरारी बनी रहे कृपा सदा सब पर तुम्हारी !
ये कैसी कश्मकश है ऐ मेरे दोस्त बड़ी अजीब सी है ये कश्मकश ए मेरे दोस्त हम तो हमेशा एक तरफा वफा निभाते चले गए पर ये लोग है जो हमे बेवफाई दिखलाते गए झूठे वादे ,झूठे सपने, झूठी दुनिया का ये जंजाल है यहां तो चारो तरफ दूर दूर है फैला झूठ का मायाजाल है लोगों ने चेहरे पर लगाया है झूठ का मुखौटा नही दिखाना चाहते है वो अपना असली चौखटा अब तो यहां घुटन सी महसूस होती है ए मेरे दोस्त अब तो निकलना है यहां से बेहतर ए मेरे दोस्त।
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