"मैं लौट आया हूँ"*
वो कहते हैं, मैं हार गया हूँ, मैं कहता हूँ, मैं लौट आया हूँ। छोड़ कर गया था जो शोर में, मैं उसी खामोशी से लौट आया हूँ। मत पूछो, कहाँ था इतने दिन, मैं अपने ही भीतर, एक जंगल में था, जहाँ हर पेड़ मेरा ही डर था, हर पत्ता, मेरा ही वहम था, मैं उन पेड़ों को काट कर, लौट आया हूँ। मैंने अपनी हार को देखा है, बहुत करीब से, वो डरावनी नहीं थी, वो तो बस एक आईना थी, जो कह रही थी - "तू कोशिश ही कहाँ कर रहा था?" तो अब मैं आईना तोड़ कर नहीं, आईना बदल कर लौट आया हूँ। अब मुझे भीड़ में मत ढूंढो, मैं भीड़ से निकल कर, खुद को ढूंढ कर, लौट आया हूँ। ये मेरी जीत नहीं है दोस्तों, ये मेरी वापसी है, और वापसी हमेशा, जीत से बड़ी होती है।