निकले हैं हम आध्यात्म की यात्रा पर आज खोजने है अपने आप को हम आज कुछ सवालों का जवाब जानने को है मन उत्सुक क्या है इस जीवन का है उद्देश्य मन जानने को इच्छुक भागते रहते सपनों की मृगमरीचिका के पीछे हम सब कुछ पाने की चाहत में भूल जाते हैं अपने आप को हम छूट जाता सब कुछ इस अंतहीन इच्छाओं की अभिलाषा में रह जाता है खालीपन मंजिल पर पहुंच कर जीवन में चले हैं आज जीवन यात्रा पर खोजने हम अपने आप को चले है आज जीवन यात्रा पर खोजने हम अपने आप को
मेरे कृष्णा, मेरे गोपाला,मेरे कान्हा लेकर विष्णु अवतार पृथ्वी पर जन्मा, करने कल्याण सृष्टि का देने जग को ज्ञान गीता का , मां देवकी का दुलारा मां यशोदा की आंखों का तारा, गोकुल की अद्भुत बाल लीला माटी खा ब्रह्मांड दिखाया,मेरे गोपाला, मेरे माखनचोर, मेरे गिरधारी मेरे नंदलाला ,मेरे मोर मुकुटधारी, कलिया को नाथा,गोवर्धन पर्वत को कनिष्ठा पे उठाया कंस के अत्याचारों से जग को मुक्ति दिलाया , मुरली की मधुर धुन से जग हुआ मोहित गोपियां के संग रास लीला ने किया सम्मोहित राधा कृष्ण प्रेम की अद्भुत पराकाष्ठा आध्यात्मिक प्रेम की अमर गाथा, विश्व को भक्ति,ज्ञान और कर्म योग का मार्ग दिखाकर गीता का अद्भुत ज्ञान बताकर धर्म पथ पर चलना सिखलाकर सबको सत्य और कल्याण का मार्ग दिखाकर, मेरे गिरधारी, मेरे मुरारी बनी रहे कृपा सदा सब पर तुम्हारी !
छठ व्रत का महापर्व छठ व्रत का यह महापर्व और सूर्यदेव का पूजन पर्व। सूर्यदेव की स्वसा आप हो, ब्रह्मा की मानसपुत्री हो।। कठिन महाव्रत छठ मैया का, कार्तिक षष्ठी शुरू पर्व का। अद्भुत व्रत है तीन दिवस का, पूजा संध्या काल उषा का।। अर्घ्य दिया जाता छठ व्रत में, डूबते और उगते सूरज को। मंत्र न कोई पंडित रहता, नमन हृदय की उस श्रद्धा को।। प्रथम दिवस है न्हाय खाय का, द्वितीय दिवस है खरना का। तृतीय दिवस है निर्जल व्रत का, अर्घ्य डूबते सूरज का।। चतुर्थ दिवस को उषाकाल में, उगते सूर्य को देते अर्घ्य। फल प्रसाद का पारण करके, व्रत को पूरण करते सब ।। नदी किनारे घाट स्वच्छ कर, धूप दीप से डाल सजाकर। ठेकुआ, लड्डू, फल अर्पण कर, हाथ जोड़कर शीश नवाकर।। छठ मैया और सूर्यदेव को, बारम्बार प्रणाम करें। सदा सुहागिन हमको रखना, कुल-कुटुम्ब सानन्द रहें।। संतानो की रक्षा और स्वास्थ्य का आशीष देकर, बना रहे आपका आशीर्वाद हम सब पर ।।
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Peeping into the glorious moments of the past.